बिहार में नई सरकार पूर्ण बहुमत से तो बन गई है, लेकिन सम्पूर्ण बहुमत से नहीं बनी है। ऐसे में पांच साल सरकार चलना मुश्किल लग रहा है। पांच साल चले भी तो हर कदम पर नई सरकार को अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। इस बार सरकार मजबूत नहीं, मजबूर दिख रही है। इसकी ताजा तस्वीर विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में दिख गई है। जब NDA ने अपनी तरफ से उम्मीदवार उतारा तो महागठबंधन ने भी अपनी तरफ से प्रत्याशी उतार कर पूरे सत्तारूढ़ दल को सकते में डाल दिया। ये तो शुरुआत है, अभी पूरे पांच साल में हर कदम पर सरकार के कमजोर होने का अहसास विपक्ष कराता रहेगा।
इन मसलों पर होती है वोटिंग
•विभागों की बजट मांग पर वोटिंग
•विभागों के अनुदान बजट पर वोटिंग
•नए विधेयक को पास कराने के लिए वोटिंग
•इसके अलावा उन सभी मुद्दों पर वोटिंग होती है, जिसपर विपक्ष वोटिंग की मांग करता है l

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